Anuj Abr

सफ़र मुश्किलों से भरा दिख रहा है
तभी हर मुसाफ़िर डरा दिख रहा है

वो सावन के अंधे हैं उनको बताओ
जिन्हें बस हरा ही हरा दिख रहा है

कोई दर्द दिल में छुपाए हो शायद
ये जो आदमी मसखरा दिख रहा है

हमारे तुम्हारे है जो दरमियां अब
हमें ख़ूब वो दायरा दिख रहा है

कोई ताज में देखता है मुहब्बत
किसी को ये इक मक़बरा दिख रहा है

लगे हो मसीहा बनाने में जिसको
मुझे वो कोई दूसरा दिख रहा है

ये संभव है आगे कोई खोट निकले
ये सोना अभी जो खरा दिख रहा है
Anuj Abr

Anuj Abr | We The Sukhanwar