सफ़र मुश्किलों से भरा दिख रहा है
तभी हर मुसाफ़िर डरा दिख रहा है
वो सावन के अंधे हैं उनको बताओ
जिन्हें बस हरा ही हरा दिख रहा है
कोई दर्द दिल में छुपाए हो शायद
ये जो आदमी मसखरा दिख रहा है
हमारे तुम्हारे है जो दरमियां अब
हमें ख़ूब वो दायरा दिख रहा है
कोई ताज में देखता है मुहब्बत
किसी को ये इक मक़बरा दिख रहा है
लगे हो मसीहा बनाने में जिसको
मुझे वो कोई दूसरा दिख रहा है
ये संभव है आगे कोई खोट निकले
ये सोना अभी जो खरा दिख रहा है
Anuj Abr