माली बाबा!

फूलों की हत्या करनी थी
पानी देना कम कर देते
पर निरीह फूलों की ख़ातिर
क्यों तलवार निकाली बाबा!

हमको कुछ बातें करनी हैं
कब तुम होगे ख़ाली बाबा!
माली बाबा! माली बाबा!

सब के सब अचरज में डूबे
तना फूल पत्ती जड़ कलियाँ
लेकिन तुम से ख़ामोशी से
पूछ रही हर डाली बाबा!

हमको कुछ बातें करनी हैं
कब तुम होगे ख़ाली बाबा!
माली बाबा! माली बाबा!

इंसानों की तरह उम्र सारे
रिश्तों की भी होती है
हमने तुमसे तुमने हमसे
क्यों उम्मीदें पाली बाबा!

हमको कुछ बातें करनी हैं
कब तुम होगे ख़ाली बाबा!
माली बाबा! माली बाबा!
Gyan Prakash Akul

माली बाबा! | We The Sukhanwar