Yogendra Singh Raghuwanshi

बुलंदी पर उड़े तो जा रहे हो
सुनहरे पंख हैं इतरा रहे हो

जरा पैरों के नीचे झाँक तो लो
ज़मीं अपनी ही खोते जा रहे हो
Yogendra Singh Raghuwanshi