Deepak Malviya

समंदर के तलबगारों को दरिया तक नहीं मिलता।
कभी जो प्यास लग जाएँ तो क़तरा तक नहीं मिलता।

कि बच्चे रोज़ रख लेते हैं थैले में किताबों को
गरीबी में कई बच्चों को बस्ता तक नहीं मिलता।
Deepak Malviya