Zain Misbahi

ग़ुंचओ गुल कली पे शेर कहे
जब भी उसकी गली पे शेर कहे

ज़िन्दगी बे वफ़ा है यूं हम ने
रात दिन ज़िन्दगी पे शेर कहे

कोई दुनिया में ऐसा शायर है
जो तेरी बे रुख़ी पे शेर कहे

आप सुन लीजिए बतौरे ख़ास
हम ने बस आप ही पे शेर कहे

सुन के पत्थर भी अश्क बार हुऐ
अपनी जब बे बसी पे शेर कहे

शर्म से खुश्क हो गया दरिया
हम ने जब तिशनगी पे शेर कहे

ज़ैन इस मतलबी ज़माने में
आपने दोस्ती पे शेर कहे
Zain Misbahi