ग़ुंचओ गुल कली पे शेर कहे
जब भी उसकी गली पे शेर कहे
ज़िन्दगी बे वफ़ा है यूं हम ने
रात दिन ज़िन्दगी पे शेर कहे
कोई दुनिया में ऐसा शायर है
जो तेरी बे रुख़ी पे शेर कहे
आप सुन लीजिए बतौरे ख़ास
हम ने बस आप ही पे शेर कहे
सुन के पत्थर भी अश्क बार हुऐ
अपनी जब बे बसी पे शेर कहे
शर्म से खुश्क हो गया दरिया
हम ने जब तिशनगी पे शेर कहे
ज़ैन इस मतलबी ज़माने में
आपने दोस्ती पे शेर कहे
Zain Misbahi