Deepanshu chaudhary

रात ढलते ही यहाँ फिर दिन नया हो जाएगा
ख़त्म सारा एक दिन ये मसअला हो जाएगा

​वक़्त की ठोकर से पत्थर मोम बन के पिघलेंगे
सख़्त लहजा भी किसी दिन नर्म सा हो जाएगा

​ज़ख़्म भर भी जाएँ पर क्या दर्द ये टल पाएगा?
तूने क्या सोचा कि सब कुछ पहले सा हो जाएगा
Deepanshu chaudhary

Deepanshu chaudhary | We The Sukhanwar