तुलसी सूर कबीर की बातें
जैसे पीर फ़कीर की बातें
खो जाते हैं सब बातों में
सुनकर इक तस्वीर की बातें
क्या मतलब दुनिया से उसको?
राँझे से कर हीर की बातें
तेरी बातें वैसी ही हैं
जैसी ग़ालिब-मीर की बातें
आज ही हम आज़ाद हुए हैं
आज न कर ज़ंजीर की बातें
राह मेरी आसाँ करती है
हरदम मेरे पीर की बातें
Shravan Kumar