Nivedan Mishra

एक तो ये हो कि मलाल न हो
ज़िंदगी में कोई कमाल न हो

रूह में बा-बदन उतर जाए
कोई इस दर्ज़ा हम-ख़्याल न हो

चुप्पियों पर अमल ज़रूरी है
एहतियातन कोई सवाल न हो

अब भी ताज़े हैं और गहरे हैं
इतनी ज़ख़्मों की देखभाल न हो

अब नुमाइश नहीं हो फूलों की
और आँसू का इस्तिमाल न हो

तब्सिरा दोस्ती पे हो खुल कर
इश्क़ की बात बहर-हाल न हो

ख़ुशबुएँ एतराज़ करती हैं
अब यहाँ कोई गुल-मिसाल न हो

राइगानी मिसाल बन जाए
हश्र इतना भी बा-कमाल न हो
Nivedan Mishra

Nivedan Mishra | We The Sukhanwar