Fazal Abbas Aabdi

गुज़री तमाम उम्र ग़म-ए-रोज़गार में
पाया न चैन हमने कभी इस दयार में

​वो दिन भी थे कि मिन्नत-ए-राहत फ़ुज़ूल थी
अब लुत्फ़ ढूँढते हैं दिल-ए-सोग़वार में

​जिसको भी देखिये वो अकेला मिला हमें
कितने ही क़ाफ़िले थे हद-ए-रहगुज़ार में

​आसान कब था हिज्र की रातों को काटना
सदियों की प्यास जागी है इक इंतज़ार में
Fazal Abbas Aabdi

Fazal Abbas Aabdi | We The Sukhanwar