"अरे, रुक जा मेरे माली!"

अरे, रुक जा मेरे माली!

​चमन बर्बाद कर देगा,
हवा में ज़हर भर देगा;
बना देगा इसे भी क्या,
तू अपनी ही तरह जाली?

​अरे, रुक जा मेरे माली!

​तू 'मन की बात' करता है,
दिनों को रात करता है;
तू जादूगर है, जादूगर—
महामानव! महा 'बाली' !

​अरे, रुक जा मेरे माली!

कभी महँगाई पर भी बोल,
घणी दुखदाई पर भी बोल;
ये जंगल कट रहे हैं क्यों,
ये जमुना हो रही नाली ?

अरे, रुक जा मेरे माली!

युवाओं का लहू पीकर,
बना है साहिब-ए-तीतर;
मैं चुप हूँ, तर्बियत ऐसी—
कि दे सकता नहीं गाली!

अरे, रुक जा मेरे माली!

तेरे वादे, तेरे जुमले,
सहें कब तक वृथा हमले?
ये 'अच्छे दिन' की आमद में,
हुई है रात और काली!

​अरे, रुक जा मेरे माली!

शिकम की आग में जल कर,
हथेली अपनी मल-मल कर;
क़तारों में खड़ा 'भारत',
सिलेंडर हो गए ख़ाली!

​अरे, रुक जा मेरे माली!

​मेरे प्यारो! मेरे यारो!
वफ़ादारो! अदाकारो!
पहन कर हाथ में चूड़ी,
बजाओ 'ताली' और 'थाली'!

अरे, रुक जा मेरे माली!
Vishal Ojha 'Ehsaas'