बेटी का क्या है सार, सुनो !
घर-आँगन की यह लाली है,
खिलते फूलों की डाली है;
नूतनता का श्रृंगार लिये,
जीवन-आशा, संसार, सुनो !
बेटी का क्या है सार,सुनो !
माँ-बाप, बहन को प्यारी है,
भाई की राजदुलारी है;
दादी-दादा, नानी-नाना—
के घावों का उपचार, सुनो!
बेटी का क्या है सार, सुनो !
ख़ुशियों की इन्द्रधनुष नगरी,
है प्रेम-सुरभि,अमृत-गगरी;
हरियाली और सदानीरा,
मधुबन की मधुर बयार, सुनो !
बेटी का क्या है सार,सुनो !
ग़म दूर करे मुस्कानों से,
मन बहलाये निज गानों से;
घर को पूरा उपवन कर दे,
अब एक नहीं, सौ बार, सुनो !
बेटी का क्या है सार, सुनो !
खिलती नव-पल्लव, पंखुरियाँ,
कुचलो न कोख में नव-कलियाँ;
इन निरपराध को जीने का,
है निश्चित ही अधिकार, सुनो !
बेटी का क्या है सार, सुनो !
Vishal Ojha 'Ehsaas'