मैं तेरे हुक्म की तामील नहीं कर सकता
ख़ुद को इतना भी सहनशील नही कर सकता
दे दिया हमने बयाँ खुलके भरी महफ़िल में
सच को अब झूठ में तब्दील नहीं कर सकता
इस तरह पा लिया आँखों पे भी काबू मैंने
नम तो हो जाए मगर झील नहीं कर सकता
मैं तेरे इश्क़ में अपनों से जुदा हो जाऊँ
ऐसी हरगिज़ मैं कोई डील नहीं कर सकता
हम सुख़नवर हमें मेयार ज़रूरी है मियाँ
अपने अशआ’र को अश्लील नहीं कर सकता
Shivsagar Sahar