जब भी पहनी तिरे नाम की चूड़ियाँ
दे गईं इक नई ज़िंदगी चूड़ियाँ
तू मुकर क्यूँ गया अपने वादे से फिर
पूछती हैं ये मुझसे सभी चूड़ियाँ
याद तो अब भी करती हैं तुझको मगर
अब खनकती नहीं हैं मिरी चूड़ियाँ
तेरी दुल्हन नहीं बन सकी मैं तो क्या
हाथ में आज तक हैं सजी चूड़ियाँ
बस तिरी याद में खोई है "आरज़ू"
याद करती हैं तुझको तिरी चूड़ियाँ
Shivani Aarzoo