जाने वो क्या - क्या सहता है
आँसू पीकर जो हँसता है
ज्यादा ऊँचा जो उड़ता है
इक दिन वो नीचे गिरता है
जिसकी जितनी श्रद्धा होती
ज्ञान उसे उतना मिलता है
सुख-दुख और नहीं है कुछ भी
फल कर्मों का सँग चलता है
उसकी बातों में मत आना
वो छलनी में जल भरता है
आँख दिखाने वाले सुन ले
चढ़ता सूरज भी ढलता है
जीता जो औरों की खातिर
ऐसा शख़्स न अब दिखता है
डॉ० लवलेश दत्त