आँगन में खेलता महताब देखा थामैंने भी एक खूबसूरत ख़्वाब देखा थाछोड़कर तुम शहर रुख़्सत हो गई उस दिनआशिक़ों का हर तरफ़ सैलाब देखा थाEbraheem Khan Saeed