बंदिशें लाख लगा लें ये ज़माने वाले
प्यार की ख़ुशबू लुटाएगें लुटाने वाले
उनके ख़्वाबों व ख़यालों पे है कब्ज़ा मेरा
कैसे सोएंगे मेरी नींदें चुराने वाले।
अपने बच्चों की तरह पालते हैं वो इनको
पेड़ काटेंगे नहीं पेड़ लगाने वाले
क़ब्र पे आते हैं, रोते हैं, दुआ पढ़ते हैं
इससे ज़्यादा करें क्या रब्त निभाने वाले
साथ रहने के भी आदाब निभाया हमनें
देर तक साथ चले छोड़ के जाने वाले
सब्र की आग में जल जाएगा सब कुछ 'रूबी'
भूल जाते हैं ग़रीबों को सताने वाले
Rubi Gupta satyendra