Satyendra Bharill

फूलों के इन्तिशार में मारा गया हूं मैं
ख़ुद के ही इंतज़ार में मारा गया हूं मैं

हिज्रो - विसाल, दर्द के पर्वत को पार कर
यादों की इक दरार में मारा गया हूं मैं

दुनिया कभी भी मेरी तवज्जुह में थी नहीं
ख़ुद अपने इफ़्तिख़ार में मारा गया हूं मैं

बहरी नहीं थीं यूं तो ये तेरी समाअतें
इक अन कही पुकार में मारा गया हूं मैं

जेबों की हद थी और ये बाज़ार था बड़ा
चीज़ों के इश्तिहार में मारा गया हूं मैं
Satyendra Bharill

Satyendra Bharill | We The Sukhanwar