Mayank Shukla

फिर से उसी गली का सफ़र जान-बूझकर
क्यों ओखली में देते हो सर जान-बू‌झकर

वो अपनी होशियारी पे इतरा रहा है और
मैंने फंसाए जाल में पर जान-बूझकर

हद से ज़ियादा प्यार से उकता न जाए तू
रखता हूँ सो में थोड़ी कसर जान-बूझकर

सब लोग उनसे जोड़ रहे थे हमारा नाम
उड़ने ही हमने झूठी ख़बर जान-बूझकर
Mayank Shukla