Ajay Rahul

छोड़नी उनको पड़ीं ये बस्तियाँ,
दूर मंज़िल उस पे ना थी रोटियाँ

भूखे बच्चों को सुलाये किस तरह,
माँ सुनाती सिर्फ़ उनको लोरियाँ

चुभ रहा था ये नज़ारा इस क़दर,
बिल्डरों को तोड़नी थी बस्तियाँ

जब भी उठती हैं मरोड़े पेट में,
मौत से घबरा के खा ली पत्तियाँ

मुफ़्लिसी पे शेर ही कहते रहे,
दाद में मिलती रहीं बस तालियाँ!
Ajay Rahul

Ajay Rahul | We The Sukhanwar