Aatish Indori

इक मुहब्बत का ख़्वाब टूटेगा
दो दिलों पे अज़ाब टूटेगा

ख़ुद को तब तुम सँभाल पाओगे
जब वफ़ा का नक़ाब टूटेगा

देखना इक अमीर आएगा
और गुल्लक का ख़्वाब टूटेगा

तुम परेशाँ मेरे लिए मत हो
दूसरी बार ख़्वाब टूटेगा

ज़िंदगी की उमीद टूटेगी
झाड़ से जब गुलाब टूटेगा
Aatish Indori

Aatish Indori | We The Sukhanwar