इक मुहब्बत का ख़्वाब टूटेगा
दो दिलों पे अज़ाब टूटेगा
ख़ुद को तब तुम सँभाल पाओगे
जब वफ़ा का नक़ाब टूटेगा
देखना इक अमीर आएगा
और गुल्लक का ख़्वाब टूटेगा
तुम परेशाँ मेरे लिए मत हो
दूसरी बार ख़्वाब टूटेगा
ज़िंदगी की उमीद टूटेगी
झाड़ से जब गुलाब टूटेगा
Aatish Indori