क्या क्या न ज़ख़्म खाए हैं उस बेवफ़ा के हाथ
ऐ काश कोई रख दे ज़रा इन पे आ के हाथ
गैरों का नाम अपनी हथेली पे लिख के वो
हम को दिखा रहे हैं बहुत मुस्कुरा के हाथ
कुछ देर के लिए मेरी साँसें ही रूक गईं
पीछे से उस ने रख दिए पलकों पे आ के हाथ
रूदाद-ए-ग़म जो हम ने सुनाई तो ये हुआ
सब ने बुलंद कर लिये अपने दुआ के हाथ
हम अपने दिल का हाल बयाँ करते रह गए
और सो गए वो मेज़ पर अपना टिका के हाथ
ग़म के भंवर में ख्वाबों को जिस ने डुबा दिया
क्यों दिल की कश्ती सौंप दी उस नाख़ुदा के हाथ
साहिल वो मेरी लाश के नज़दीक बैठ कर
रोते ही जा रहे हैं मिरा क्यों दबा के हाथ
Shashank Singh Thakur "SAAHIL"