ABHISHEK SONI

आँखें आँसू से हैं नम
हाँ इतने मजबूर हैं हम

कीमत जो रखी थी उसने
हम थे उससे थोड़े कम

आँखें यूँ भर आईं जैसे
फूलों पर बिखरी शबनम

टूटा शीशा जोड़ रहे
पत्थर को समझाकर ग़म
ABHISHEK SONI

ABHISHEK SONI | We The Sukhanwar