Shashank Singh Thakur "SAAHIL"

मौजों की रवानी के सिवा कुछ भी नहीं है
उस आँख में पानी के सिवा कुछ भी नहीं है

कहने को बड़ा लफ्ज़ है ये लफ्ज़-ए-मोहब्बत
पर दर्द के सानी के सिवा कुछ भी नहीं है

हम सोच के पढ़ते हैं जिसे प्रेम कहानी
वो ग़म की कहानी के सिवा कुछ भी नहीं है

सीने की सिपर और ये अबरु की कटारी
क़ातिल में जवानी के सिवा कुछ भी नहीं है

बरसात की रूत, सर्द हवाऐं, वो तिरा लम्स
अब याद-दहानी के सिवा कुछ भी नहीं है

साहिल मेरे इम्लाक में आँगन के अलावा
इक रात की रानी के सिवा कुछ भी नहीं है
Shashank Singh Thakur "SAAHIL"