Shashank Singh Thakur "SAAHIL"

उस के हर लफ्ज़-ओ-म'आनी में हम भी होते थे
वो भी क्या दिन थे कहानी में हम भी होते थे

सर्द महरी ने हुनर बोलने का छीन लिया
वरना हर जादू-बयानी में हम भी होते थे

एक दो और भी होते थे रक़ीब उस के मगर
उसकी हर शाम सुहानी में हम भी होते थे

हम को जंज़ीर से बाँधे है इक नदी वरना
मौज दर मौज रवानी में हम भी होते थे

जाम बन कर के जिया करते थे हम भी साहिल
मय वो होता था तो पानी में हम भी होते थे
Shashank Singh Thakur "SAAHIL"

Shashank Singh Thakur "SAAHIL" | We The Sukhanwar