sachin goel

कितने गीत लिखे जीवन भर
कितने लिख के मिटाये
लेकिन लिख ना पाया जिससे
तुझ तक पहुंचा जाये

तेरे रूप की दासी चांदनी
चाँद को पहरेदार लिखा
जुल्फ लिखी तेरी काली घटायें
तुझको सारा संसार लिखा
ना जाने कितनी उपमाओं
के कंगन पहनायें
लेकिन लिख ना पाया जिससे
तुझ तक पहुंचा जाये

तेरी अंगड़ाई को मैंने
मौजों की रफ्तार लिखा
तेरी पायल की खन खन को
बारिश की बौछार लिखा
तेरा आँचल लिखा गगन में
मस्त हवा लहरायें
लेकिन लिख ना पाया जिससे
तुझ तक पहुंचा जाये

तुझको लिखने की चाहत में
रात रात भर जागा
होगा तुझसे मेरा सामना
साथ चाँद के भागा
सुबह हुई तो सचिन अपनी
किस्मत पर पछताये
लेकिन लिख ना पाया जिससे
तुझ तक पहुंचा जाये
sachin goel

sachin goel | We The Sukhanwar