कितने गीत लिखे जीवन भर
कितने लिख के मिटाये
लेकिन लिख ना पाया जिससे
तुझ तक पहुंचा जाये
तेरे रूप की दासी चांदनी
चाँद को पहरेदार लिखा
जुल्फ लिखी तेरी काली घटायें
तुझको सारा संसार लिखा
ना जाने कितनी उपमाओं
के कंगन पहनायें
लेकिन लिख ना पाया जिससे
तुझ तक पहुंचा जाये
तेरी अंगड़ाई को मैंने
मौजों की रफ्तार लिखा
तेरी पायल की खन खन को
बारिश की बौछार लिखा
तेरा आँचल लिखा गगन में
मस्त हवा लहरायें
लेकिन लिख ना पाया जिससे
तुझ तक पहुंचा जाये
तुझको लिखने की चाहत में
रात रात भर जागा
होगा तुझसे मेरा सामना
साथ चाँद के भागा
सुबह हुई तो सचिन अपनी
किस्मत पर पछताये
लेकिन लिख ना पाया जिससे
तुझ तक पहुंचा जाये
sachin goel