हर शख़्स यहाँ करता है इंसाफ़ की बातें
पर पीठ के पीछे वही औसाफ़ की बातें
दुनिया को बताते हैं जो शफ़्फ़ाफ़ तरीक़े
करते हैं वही छुप के ना-शफ़्फ़ाफ़ की बातें
तौहीद का दावा है मगर वक़्त-ए-ज़रूरत
लाते हैं ज़बाँ पर ये बुत-ए-काफ़ की बातें
मज़हब का जिसे इल्म न दुनिया की समझ है
करता है वही दीन के अतराफ़ की बातें
सच बोलने वालों को यहाँ ज़हर मिला है
करते नहीं अब कोई भी इंसाफ़ की बातें
रुस्वा न कहीं कर दे तुम्हें तल्ख़-मिज़ाजी
"अमजद" न करो महफ़िल-ए-अशराफ़ की बातें
Syed Amjad Hussain