शब-ओ-रोज़ की ये गर्दिश हमें चीख कर बताती कहीं सुब्ह नूर होगी कहीं तीरगी मिलेगी नहीं ग़म असद है हमको मिरा है यक़ीन कामिल जहां बे-अमान होंगे मुझे रहबरी मिलेगीAsad Khan Lakhimpuri (Barwar)