Anchal Maurya

बोझ कंधों पे उठा कर बने पत्थर लड़के
दफ़्न ख़्वाबों पे ही बुनते हैं मुक़द्दर लड़के

बाप की बूढ़ी थकावट का सहारा बनने
बेच देते हैं ख़ुद अपने ही वो शह्पर लड़के

मुस्कुराहट के लबादे में छुपा कर अपना
पालते रहते हैं अंदर ही इक अज़्दर लड़के

चीख़ उठते जो अगर मोम के पुतले होते
सह गए ज़ेहन पे गिरता हुआ ख़ंजर लड़के

तंग गलियों में किसी ख़्वाब की हसरत के लिए
कट के रह जाते हैं बस एक ही दर पर लड़के

घर की दहलीज़ को रौनक़ जो मिले 'अंचल' तो
ख़ुद झुलस जाते हैं बन कर के वो मज़्हर लड़के
Anchal Maurya

Anchal Maurya | We The Sukhanwar