लो फिर से नया साल मुबारक हो
ज़िंदगी ये बदहाल मुबारक हो।
बस है ये थोड़े समय की ही रौनक
फिर वही जी जंजाल मुबारक हो।
सांझ सवेरे करना ख़ुद को तबाह
सब बुरे अच्छे ख़याल मुबारक हो।
घर हो या दफ़्तर, या हो बाज़ार
हर किसी को है मलाल मुबारक हो।
कुछ को अमीरी, तो कुछ को ग़ुरबत
रिज़्क हराम ओ हलाल मुबारक हो।
मुल्क के मसले ओ नेता के भाषण
जनता के सारे सवाल मुबारक हो।
भूल के हर ग़म जश्न मनाते हैं लोग
क़ुदरत का ये कमाल मुबारक हो।
AJAY PRASAD