AJAY PRASAD

अब कोई  किसी के लिये है करता दुआ ही नहीं
लगता है कोई इश्वर,मसीहा या  खुदा ही नहीं ।

खतरे में है चैनोअमन पूरी दुनिया की  क्या कहें
हम तो जी रहे हैं यूँ जैसे कुछ भी हुआ ही नहीं ।

कौमें तो हैं मशगूल अपनी पहचान चमकाने में
नफरत को मिटा दे बनी एसी तो   दवा  ही नहीं।

मज़हब ही है सीखाती अब  आपस में हमें  बैर भी
मिल जुल कर रहे कैसे कोई रिश्ता  रहा  ही नहीं ।

इतनी मायुसी भी नहीं अच्छी लगती तुझसे अजय
कुछ तो ऐसा कर तू किसी ने जैसा किया ही नहीं
AJAY PRASAD