Anchal Maurya

जो कही उससे ज़ियादा अनकही अच्छी लगेगी
दिल सुने गर दिल की तो फिर ख़ामुशी अच्छी लगेगी

इस कड़ी गर्मी में तेरी छाँव मिल आए अगरचे
गर्दिश-ए-दौराँ में भी ये ज़िंदगी अच्छी लगेगी

तुमको भी महसूस होगा इस दिल-ए-मुज़्तर का ग़म जब
ज़ाविया तुम पर खुलेगा शाइरी अच्छी लगेगी

हसरतें सब मोम के मानिंद पिघलें बाद उसके
चाँदनी में तीरगी की बेरुख़ी अच्छी लगेगी

सच तो ये है इख़्तियार-ए-शौक़ जब हो जाएगा तब
वक़्त-ए-मर्ग-ए-हिज्र में भी आशिक़ी अच्छी लगेगी

मौत की उस शाहज़ादी के गले लग जाएँगे फिर
रफ़्ता-रफ़्ता आशिक़ों को ख़ुदकुशी अच्छी लगेगी

शहर की राहों में कुछ दिन भीड़ बनके गर चलो तुम
बाद उसके गाँव की ये धूप भी अच्छी लगेगी

आइना-गर जो बता दे सच कि आईना है शब-रंग
ज़ुल्मत-ए-शब की भी 'अंचल' तीरगी अच्छी लगेगी
Anchal Maurya

Anchal Maurya | We The Sukhanwar