हसीन शाम वो इक आज भी असर में है
वजूद मेरा फ़क़त तेरी ही नज़र में है
सबा जो छू के गई है मेरे लबों की तपिश
ये कौन सा है नशा जो अभी सफ़र में है
हटा जो पर्दा लब-ओ-रुख़ से छा गया जलवा
अमास रात भी रौशन हद-ए-नज़र में है
जो रात आज तेरा नाम लेके ढलने लगी
तो ख़्वाब कहने लगे कौन ये ख़बर में है
Anchal Maurya