Niranjan Kumar Mahato

निभाने आए कब रिश्ता हमारा,
खुला था दिल का दरवाज़ा हमारा।

बहुत महँगा था जिसको खोया हमने,
वो झुमका था बरेली का हमारा।

हम अपने बच्चों को महँगे लगे थे,
फ़क़त दो वक़्त था ख़र्चा हमारा।

किसी क़ीमत पे हम बिकते नहीं हैं,
करोगे आप क्या सौदा हमारा।

पड़ोसन से यही माँ कह रही थी,
बहू का हो गया बेटा हमारा।

रखेंगे दूर जब माँ-बाप को हम,
यही सीखेगा फिर बच्चा हमारा।

भरोसा कर लिया अपनों पे हमने,
वही सब खा गए पैसा हमारा।
Niranjan Kumar Mahato