Niranjan Kumar Mahato

खुश्बू में डूबे उसका बदन बोलने लगा
जिसकी तलाश में कोई दम तोड़ने लगा।

बीवी के ख़ौफ से मेरा दिल काँपने लगा
ख़िदमत में उसकी मेरा बदन टूटने लगा

ख़ातून की पनाह में बेहाल जो हुआ,
वो शख़्स मुझ से अपना पता पूछने लगा।

जब ख़ुश्बू आई उसमें गुल-ए-सुर्ख़ की तरह,
तब देखा मन मयूर मेरा नाचने लगा।

अपने वतन में लौट के इतना हुआ वो ख़ुश,
मानो जमीन को ख़ुशी से चूमने लगा।

तुझमें मोहब्बतों का निरंजन उठा धुआँ,
कमबख्त इश्क़ के लिए मैं सोचने लगा
Niranjan Kumar Mahato

Niranjan Kumar Mahato | We The Sukhanwar