Haseeb Soz

यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है
कई झूटे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है

न इतना शोर कर ज़ालिम हमारे टूट जाने पर
कि गर्दिश में फ़लक से भी सितारा टूट जाता है

तसल्ली देने वाले तो तसल्ली देते रहते हैं
मगर वो क्या करे जिसका भरोसा टूट जाता है

किसी से इश्क़ करते हो तो फिर ख़ामोश रहिएगा
ज़रा-सी ठेस से वर्ना ये शीशा टूट जाता है
Haseeb Soz

Haseeb Soz | We The Sukhanwar