Rubi Gupta satyendra

वो जिसकी तरफ़ देखकर मुस्कुराये
क़यामत क़यामत क़यामत ही ढाये

ये मासूम चेहरा ये क़ातिल निगाहें
है मुमकिन कहां कोई ज़द में न आये

ये मिसरी सी बोली, ये पानी सा लहजा
तेरी बातों में कोई कैसे न आये

दिल ओ जान मुझपर लुटाने से पहले
उसे पूरा हक़ है मुझे आजमाये

मुहब्बत भरी गुफ़्तगू हो रही है
ज़माने को इसकी ख़बर हो‌ न जाये

मैं डी पी तुम्हारी बहुत देखतीं हूं
कहीं तुमको मेरी नज़र लग न जाये

मुहब्बत का कैसा करिश्मा है 'रूबी'
कोई फूल तो कोई पत्थर लुटाये
Rubi Gupta satyendra