Rajesh Reddy

अकेलेपन की आदत ने बिगाड़ा
मुझे मेरी ही संगत ने बिगाड़ा

नहीं टिकतीं किसी मंज़र पे नज़रें
मिरी आँखों को ह़ैरत ने बिगाड़ा

बनाया काम बदनामी ने कोई
तो कोई काम शौहरत ने बिगाड़ा

मिली बस चार दिन की ज़िंदगानी
हमें इतनी-सी मोहलत ने बिगाड़ा

करे भी तो करे किससे शिकायत
वो जिसका काम ग़ैरत ने बिगाड़ा

बिगाड़ा खेल जब क़ुदरत का हमने
हमारा खेल क़ुदरत ने बिगाड़ा
Rajesh Reddy