चला था दिल किसी बेसम्त रहगुज़र में यूँ
नज़र पड़ी सो ठहर सा गया सफ़र में यूँ
बिखर गई जो फ़ज़ाओं में तितलियों की महक
लबों पे आ गई वो नर्म-सी ख़बर में यूँ
सुकूत-ए-शब में खलल डाली किसकी यादों ने
ये दिल की धड़कने गुमसुम सी थीं असर में यूँ
सुकूत-ए-शहर में आवाज़ गूंजती है क्यूँ
वो चीख फिर उतर आई मेरी नज़र में यूँ
सवेरा था किसी आहट ने हमको दी आवाज़
उलझ गया हूँ मैं फिर कोई बे-ख़बर में यूँ
गो ज़हर घुल गया पलकों से इस क़दर दिल में
तो दर्द हो गया शामिल किसी बशर में यूँ
Anchal Maurya