लगेंगे ग़म भी मज़ीद उस पर, कि बीज ऐसा वो बो रही हैकिसी की यादों से थक गई जब, तो मेरे काँधे पे सो रही हैमैं मन-ही-मन मुस्कुरा रहा था, कि रो रही है वो मेरे ख़ातिरमैं रो दिया जब पता चला ये, किसी के हिस्से की रो रही हैArman Habib