AJAY PRASAD

लहज़े में गर उसकी लज़्ज़त नहीं है
समझो के तुमसे  मुहब्बत नहीं है

इस दौर का ये है दस्तूर यारों
दौलत नहीं है तो इज़्ज़त नहीं है

माँ बाप की सेवा घर से लगावट
बच्चों में तो अब ये फितरत नहीं है

गर  बेहयाई हो इनकम  का ज़रिया
पैसों की  अब कोई किल्लत नहीं है

चाहे अजय तुम जतन कितने कर लो
रिश्तों  की अब  कोई कीमत नहीं है
AJAY PRASAD

AJAY PRASAD | We The Sukhanwar