देवेश त्रिपाठी

अब नज़र सम्मान पर है
वक़्त जब उतरान पर है

वो खुदा है मुस्कुराए
जोर हम इंसान पर है

भीड़ में चलने लगा हूँ
आँख अब सामान पर है

नौकरी कैसे मिलेगी ?
काम तो पहचान पर है
देवेश त्रिपाठी

देवेश त्रिपाठी | We The Sukhanwar