अब नज़र सम्मान पर हैवक़्त जब उतरान पर हैवो खुदा है मुस्कुराएजोर हम इंसान पर हैभीड़ में चलने लगा हूँआँख अब सामान पर हैनौकरी कैसे मिलेगी ?काम तो पहचान पर हैदेवेश त्रिपाठी