तेरा जब नाम आ जाए ये सिर अज़मत से झुक जाएनज़र तेरी जो पड़ जाए मेरी क़िस्मत चमक जाएपरेशानी मेरे मौला कभी ऐसी नहीं देना वजह से जिसकी मेरा सिर किसी के दर पे झुक जाएKamil Khan 'Kamil'