तू जो छोड़ेगा तो बेमौत ही मर जायेगा,
शाख़ से टूट के पत्ता ये किधर जायेगा।
उसके वादे का क्या है वो तो करेगा लेकिन,
ऐन वो वक़्त पे वादे से मुकर जायेगा।
इन दिनों ही है खुली उसकी हक़ीक़त मुझ पे,
लग रहा अब वो मेरे दिल से उतर जायेगा।
सात पर्दों में छुपाओ न बताओ लेकिन,
इश्क़ ख़ुशबू है हवाओं में बिखर जायेगा।
गर जो लम्हात मसर्रत के नहीं ठहरे तो,
दौर-ए-गर्दिश भी न ठहरेगा गुज़र जायेगा।
नफ़्स को मार लगा ख़्वाहिशों पे कुछ बंदिश,
ये जो कर ले तो तेरा हश्र सँवर जायेगा।
वो जो ख़ुश-बाश खड़ा साथ है रक़ीबों के,
वो ही कहता था नयन हिज्र में मर जायेगा।
Seema Pandey Mishra