Kamil Khan 'Kamil'

क्यों टकटकी लगा के कहीं देखते हो तुम
हो देखना कहीं पे कहीं देखते हो तुम

क्यों हाजतों के वास्ते तकते हो सब तरफ
जानिब मगर ख़ुदा की नहीं देखते हो तुम
Kamil Khan 'Kamil'