देवेश त्रिपाठी

जिन चरणों के छूने से ,इक नारी का उद्धार हुआ
जिन चरणों को धोने से ,केवट इस भव से पार हुआ
चरणों में जिनके हरदम, हनुमान विराजा करते हैं
मैं उसी चरण का चाकर हूं जो इस जग का आधार हुआ
देवेश त्रिपाठी

देवेश त्रिपाठी | We The Sukhanwar