जिन चरणों के छूने से ,इक नारी का उद्धार हुआजिन चरणों को धोने से ,केवट इस भव से पार हुआचरणों में जिनके हरदम, हनुमान विराजा करते हैंमैं उसी चरण का चाकर हूं जो इस जग का आधार हुआदेवेश त्रिपाठी