INAYAT ALI CHISHTI

मैं कोई साहिब–ए–शुरूर नहीं
मुझ में सब कुछ है बस फ़ितूर नहीं

लौट आओ अना की जन्नत से
तुम बशर हो बहिश्ती हूर नहीं

जो मेरी ज़िंदगी में शामिल था
ख़ूबसूरत था ज़ी–शऊर नहीं

उस को बहकाया है रकीबों ने
उस बेचारे का कुछ क़ुसूर नहीं

उन को घबराना चाहिए यारों
जिन का रब तो है पर ग़फ़ूर नहीं

आप जलवा दिखाइए मुझ को
मैं 'इनायत' हूँ कोह–ए–तूर नहीं
INAYAT ALI CHISHTI

INAYAT ALI CHISHTI | We The Sukhanwar