प्यास का संदेश पानी तक
अभी पँहुचा नहीं है,
जब नदी के तीर जाना, याद रखना!
है कठिन जग में किसी के
आँसुओं का मीत होना
शोर हो अँधियार का तब
चाँदनी का गीत होना
रात का रथ रातरानी तक
अभी पँहुचा नहीं है,
यदि सुगंधों में नहाना, याद रखना!
हर तरफ बिखरी पडीं हैं
थक चुकी टूटी कथायें
बढ़ गये राही अधूरी
राह में छूटी कथायें
प्यार जो सिन्दूरदानी तक
अभी पँहुचा नहीं है,
गीत उसके गुनगुनाना, याद रखना!
हर उदासी राह में बैठी-
हुयी पलकें बिछाये
कब तुम्हारी ओर से इक
मुस्कराता गीत आए
गीत जिसकी ज़िन्दगानी तक
अभी पँहुचा नहीं है,
बस उसी का गीत गाना! याद रखना!
Gyan Prakash Akul