Kamran Abbas

वक़्त के गुज़रने से दर्द भी तो बढ़ते हैं,
तुझको याद करके हम रोज़ रात जलते हैं।

जिसमें जान होती है, उसको सब दबाते हैं,
ज़िंदा लोग पानी से फिर कहाँ उभरते हैं।

देखना तो ये है कि वो कहा बदलता है।
साथ में लिए जिसको हम सफर में चलते हैं

रस्ता जिसका देखा था उससे क्या ख़बर होगी।
इंतज़ार में लम्हे सदियों से गुज़रते है

कामरान दुनियां में हम नहीं अकेले जो।
जिंदगी को जीने में शब ओ रोज़ मरते हैं
Kamran Abbas