खुली ज़ंजीर भी ताला है हमें
तूने किस फेर में डाला है हमें
दुनियादारी नहीं आती हमको
किसी दरवेश ने पाला है हमें
उसको आए हैं दुआ देते हुए
ऐसी तरकीब से टाला है हमें
ये तग़ाफ़ुल भी तवज्जो है तिरी
ये अँधेरा भी उजाला है हमें
ख़ुद से हम दूर हुए जा रहे हैं
क्या कोई रोकने वाला है हमें
Shakeel Jamali