Shakeel Jamali

खुली ज़ंजीर भी ताला है हमें
तूने किस फेर में डाला है हमें

दुनियादारी नहीं आती हमको
किसी दरवेश ने पाला है हमें

उसको आए हैं दुआ देते हुए
ऐसी तरकीब से टाला है हमें

ये तग़ाफ़ुल भी तवज्जो है तिरी
ये अँधेरा भी उजाला है हमें

ख़ुद से हम दूर हुए जा रहे हैं
क्या कोई रोकने वाला है हमें
Shakeel Jamali

Shakeel Jamali | We The Sukhanwar