हम जी रहे हैं जान! तुम्हारे बग़ैर भी
हर दिन गुज़र रहा है गुज़ारे बग़ैर भी
सबके लिए किनारे पे होता नहीं कोई
कुछ लोग डूबते हैं पुकारे बग़ैर भी
आसान होगा मरना समझ लें जो हम ये बात
दुनिया यूँ ही रहेगी हमारे बग़ैर भी
जीते बग़ैर जीतने वालों के दौर में
कुछ लोग हार जाते हैं हारे बग़ैर भी
ऐसे भी हैं जो डूब गए दिल के साथ-साथ
दरिया में अपनी नाव उतारे बग़ैर भी
हर ह़ाल में बड़े ही रहेंगे जो हैं बड़े
वो आसमाँ हैं चाँद-सितारे बग़ैर भी
या-रब! हर इक तिलिस्म तेरी कायनात का
खुलने लगा है हमपे इशारे बग़ैर भी
Rajesh Reddy